कंपनी अगर नौकरी से निकालती है तो आपको पैसे सैलरी के हिसाब से मिलेंगे या बेसिक पे? जानें नियम

नौकरी से निकाले जाने पर कर्मचारी को छंटनी मुआवजा मिलता है, जो उसकी सेवा अवधि और वेतन के आधार पर निर्धारित किया जाता है। भारतीय श्रम कानून के अनुसार, कर्मचारी को कम से कम एक महीने का वेतन या बेसिक पे, जो भी अधिक हो, का मुआवजा मिलना चाहिए। कंपनी को नोटिस अवधि के दौरान बेसिक वेतन का भुगतान करना होता है। नए कर्मचारियों को भी इस नियम का लाभ मिलता है। इस संदर्भ में, कर्मचारी के अधिकारों और दायित्वों का समझना महत्वपूर्ण है, और यदि आवश्यक हो, कानूनी सलाह लेनी चाहिए।

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Reported by अतुल कुमार

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कंपनी अगर नौकरी से निकालती है तो आपको पैसे सैलरी के हिसाब से मिलेंगे या बेसिक पे? जानें नियम

जब किसी कंपनी द्वारा किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाता है, तो उसे छंटनी मुआवजा (retrenchment compensation) मिलता है। यह मुआवजा कर्मचारी को उसकी सेवा अवधि और वेतन के आधार पर दिया जाता है।

भारत सरकार का लेबर लॉ इस मामले में कुछ न्यूनतम मानक निर्धारित करता है। कानून के अनुसार, कर्मचारी को कम से कम एक महीने का वेतन या बेसिक पे, जो भी अधिक हो, का मुआवजा मिलना चाहिए।

अगर कंपनी नियमों का पालन नहीं करती है, तो कर्मचारी श्रम न्यायालय में शिकायत दर्ज कर सकता है। आइए जानते हैं इस कानून के बारे में…..

क्या कहता है कानून? 

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प्राइवेट कंपनियां अपने कर्मचारियों को निकाल सकती हैं, लेकिन उन्हें भारतीय श्रम कानूनों का पालन करना होगा। 5 साल या उससे अधिक समय से काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और पूरी सैलरी (जितने दिन काम किया) का हक मिलता है। यह नियम नए कर्मचारियों पर भी लागू होता है।

नोटिस पीरियड:

  • कर्मचारी द्वारा इस्तीफा देने पर: नोटिस पीरियड का पालन करना होगा।
  • कंपनी द्वारा निकालने पर: कर्मचारी को नोटिस पीरियड के दौरान बेसिक वेतन मिलता है।
  • नोटिस पीरियड की अवधि: 30 से 90 दिन (कंपनियां इसे बदल सकती हैं)।

यह जानकारी आपको नौकरी से निकाले जाने पर आपके अधिकारों को समझने में मदद कर सकती है।

अतिरिक्त जानकारी:

  • ग्रेच्युटी: अंतिम वेतन के आधार पर गणना की जाती है।
  • नोटिस अवधि: यदि कंपनी नोटिस अवधि नहीं देती है, तो कर्मचारी को नोटिस अवधि के वेतन का हक है।
  • कानूनी सलाह: यदि आपको लगता है कि आपके साथ गलत हुआ है, तो वकील से सलाह लें।

यहां कुछ संगठन हैं जो आपको नौकरी से निकाले जाने पर मदद कर सकते हैं:

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC): बेरोजगारी लाभ प्रदान करता है।
  • केंद्रीय श्रम मंत्रालय: कर्मचारियों के अधिकारों के बारे में जानकारी और सहायता प्रदान करता है।
  • ट्रेड यूनियन: सदस्यों को नौकरी से निकाले जाने पर सहायता प्रदान करते हैं।

यह सलाह दी जाती है कि आप नौकरी से निकाले जाने पर अपने अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त करें और यदि आवश्यक हो तो कानूनी सलाह लें।

नौकरी से निकाले जाने पर: आपके अधिकार और दायित्व

छुट्टियों का भुगतान:

  • यदि आप नौकरी से निकाले जाते हैं और छुट्टियां नहीं ले पाए हैं, तो आपको छुट्टियों का भुगतान (leave encashment) मिलेगा।
  • यह भुगतान आपके द्वारा ली गई छुट्टियों के आधार पर किया जाएगा।

पीएफ:

  • कंपनी आपको पीएफ निकालने में मदद करेगी।
  • यदि आपको पीएफ से संबंधित कोई सहायता चाहिए, तो आप कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

रोजगार अनुबंध:

  • जब आप नौकरी ज्वॉइन करते हैं, तो आप एक रोजगार अनुबंध (employment contract) पर हस्ताक्षर करते हैं।
  • यह अनुबंध आपके और कंपनी के बीच अधिकारों और दायित्वों को निर्धारित करता है।
  • यदि आप अनुबंध पर हस्ताक्षर करते हैं, तो कंपनी अनुबंध के अनुसार आपके साथ व्यवहार कर सकती है।

यह सलाह दी जाती है कि आप नौकरी से निकाले जाने पर अपने अधिकारों और दायित्वों को समझें।

अतिरिक्त जानकारी:

  • नोटिस अवधि: यदि कंपनी आपको नोटिस अवधि नहीं देती है, तो आपको नोटिस अवधि के वेतन का हक है।
  • ग्रेच्युटी: 5 साल या उससे अधिक समय से काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का हक है।
  • कानूनी सलाह: यदि आपको लगता है कि आपके साथ गलत हुआ है, तो वकील से सलाह लें।

यहां कुछ संगठन हैं जो आपको नौकरी से निकाले जाने पर मदद कर सकते हैं:

  • कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC): बेरोजगारी लाभ प्रदान करता है।
  • केंद्रीय श्रम मंत्रालय: कर्मचारियों के अधिकारों के बारे में जानकारी और सहायता प्रदान करता है।
  • ट्रेड यूनियन: सदस्यों को नौकरी से निकाले जाने पर सहायता प्रदान करते हैं।

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